Durga Puja पर निबंध 2022 का सबसे अच्छा दुर्गा पूजा निबंध

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हैल्लो दोस्तो, कैसे है आप सभी। दोस्तों इन दिनों कोरोना काल चल रहा है और सभी बहुत मुश्किलों से गुजर रहे है, तो हम आपकी सलामती की खूब सारी दुआ करते है ! दोस्तो आज हम आप सभी के लिए कुछ खास लेकर आये है जो आपकी आस्था और प्यार दोनो से जुड़ा हुआ है, आज हम आपके लिए durga puja par nibandh लेकर आएं है

Durga Puja Par Nibandh

हम सभी दुर्गा माँ को बहुत प्यार करते है और उनसे हमारी आस्था भी जुड़ी हुई है और हर किसी के दिल मे उनके लिए एक अलग ही जगह है। अब आप सभी उनको इतना प्यार करते ही है तो उनके बारे में भी जानना उतना ही जरुरी हो जाता है इसलिए आज फिर हम आपके सामने एक बहुत ही अच्छा निबंध लाये है जिसमे हम आप सभी को दुर्गा माता से जुड़ा बहुत ही प्रसिद्ध त्योहार “दुर्गा पूजा” के बारे में निबंध के जरिये कुछ चीजो के बारे में बताने वाले है, आज जो हम लिख रहे है वह Durga Puja Par Nibandh ( दुर्गा पूजा पर निबंध ) है जो दुर्गा माँ को समर्पित है। तो चलिए शुरू करते है आज का यह निबंध…

Durga pooja पर निबंध

दोस्तों नीचे हम आसान भाषा में हम Durga pooja पर निबंध दे रहे हैं जिन्हें आप पढ़ कर याद कर सकते हैं और कहीं पूछे जाने पर बता सकते हैं

दुर्गा पूजा क्या है

दोस्तो इतिहास यह कहता है कि भारत त्योहारों और पर्वों की भूमि है, क्या आप जानते है कि भारत को यह नाम ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं और वे सभी पूरे साल एक दूसरे के साथ मिलकर एक दूसरे के साथ मिलकर त्योहारों और उत्सवों को मनाते हैं। भारत पूरी दुनिया मे सबसे पवित्र स्थानों में से एक मन जाता है ,जहाँ बहुत सी खूबसूरत नदियाँ और अलग-अलग धर्म के बड़े-बड़े धार्मिक त्योहारों को बड़ी ही खुशी के साथ एक दूसरे को खुशी अर्पण करके मनाते है।

दुर्गा पूजा उन्ही त्योहारों में से एक त्योहार है। दुर्गा पूजा पर देवी दुर्गा को पूरे नौ दिनों तक पूजा जाता है। यह त्योहार अलग-अलग स्थानों के अनुसार सभी की पूजा और त्योहार को मनाने का तरीके भी अलग-अलग होते हैं। माँ दुर्गा के भक्त पूरे नौ दिन तक उपवास रखते है, या फिर पहले और आखिरी के दिन का उपवास रखते हैं। दुर्गा पूजा पर देवी दुर्गा की मूर्ति को अच्छे से सजाया जाता है, उनको तरह-तरह के प्रसाद चढ़ाए जाते है,कुमकुम लगाया जाता है,नारियल भी फोड़े जाते है, और उन्हें सिंदूर भी लगाया जाता है जिसके बाद माँ दुर्गा बहुत ही प्यारी दिखती है और फिर सभी अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद , कुमकुम आदि को अर्पित करके पूजा करते हैं। 

दुर्गा पूजा पर प्रकर्ति बहुत ही सुन्दर लगती हैं और वातावरण भी स्वच्छ प्रतीत होता है दुर्गा पूजा पर वातावरण और प्रकर्ति को देखकर ऐसा प्रतीति होता है कि, सचमुच में माँ दुर्गा अपने भगतो को आशीर्वाद देने के लिए स्वमं धरती पर प्रकट हुई है और अपने सभी भगतों के घरों में जाकर अपनी पूजा को स्वीकार करती है। भारत के बहुत से विद्वानों का यह भी विश्वास है कि माँ दुर्गा की पूजा करने के बाद आनंद आता है और इसके साथ ही,शांति व समृद्धि, और अंधकार का अंत होता है और बुरी शक्तियां दूर हो जाती है।आमतौर पर, लोग 6- 8 दिन लम्बा उपवास करने के बाद तीन दिनों (सप्तमी, अष्टमी और नौवीं) को भक्त पूजा करते हैं। माँ दुर्गा के भक्त देवी को खुश करने के लिए सुबह-सुबह,नौ अविवाहित कन्याओं को भोजन करवाते है और साथ में फल और दक्षिणा भी देते हैं।

दुर्गा पूजा का त्योहार पूरे देश भर में खुशहाली पूर्ण उत्सवों का रंगारंग वातावरण लाता है। माँ दुर्गा के भक्त दुर्गा की पूजा करने के लिए मंदिरों में जाते हैं या फिर घर पर ही माँ दुर्गा की मूर्ति को अच्छे से सजाकर पूरी तैयारी और भक्ति के साथ अपने अपने जीवन में खुशहाली और समृद्धि एवं भलाई के लिए पूजा करने के साथ-साथ खुशहाल जिंदगी की कामना करते हैं। नवरात्र या दुर्गा पूजा का त्योहार बुराई के ऊपर अच्छाई की जीत के रुप में मनाया जाता है।बताया जाता है की इस दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर राक्षस पर विजय प्राप्त की थी, और माँ दुर्गा के भक्तों द्वारा माँ दुर्गा पर अटूट विश्वास किया जाता है

क्योंकि भक्तों के अनुसार इस दिन देवी दुर्गा ने बैल राक्षस महिषासुर को पराजित कर विजय प्राप्त की थी। महिषासुर को तीनों लोक में कोई नही हरा पाया था लेकिन माँ दुर्गा को ब्रह्मा, भगवान विष्णु और शिव द्वारा इस राक्षस का वध करने और दुनिया को इस दुष्ट राक्षश से आजाद कराने के लिए माता दुर्गा को  बुलाया गया था। सभी देवों ने माँ दुर्गा का खूब साथ दिया और यह युद्ध पूरे नौ दिन तक चला। इस नौ दिन के युद्ध के बाद, दुर्गा माता ने उस राक्षस को दसवें दिन मार गिराया था, जिस दिन माँ दुर्गा ने राक्षश का वध किया था वह दिन दशहरा के रूप में मनाया जाता है। जैसा कि आप सभी जानते है दुर्गा पूजा को नवरात्र भी कहते है । नवरात्र का वास्तविक अर्थ, देवी और राक्षस के बीच युद्ध के नौ दिन और नौ रात से है। दुर्गा पूजा के त्योहार से भक्तों और दर्शकों सहित विदेशी पर्यटकों की पूजा स्थल पर बहुत बड़ी भीड़ जुड़ी होती है।

Durga Puja क्यू मनाया जाता है ?  

पूरे भारत में हिंदुओं द्वारा दुर्गा पूजा को मनाया जाता है लेकिन कभी आपकी यह दिमाग में जरूर आया होगा कि दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है इसका महत्व क्या होता है दोस्तों हम दुर्गा पूजा बहुत धूमधाम से मनाया करते हैं लेकिन बहुत सारे लोग इसके बारे में नहीं जानते मां दुर्गा की आराधना क्यों किया जाता है महिषासुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था जिसका शरीर आधा दित्य और आधा शरीर भैंसे का था उसने ब्रह्मदेव की कठिन तपस्या करने के बाद और अपनी तपस्या से ब्रह्मदेव को खुश किया तपस्या से खुश होकर ब्रह्मदेव प्रकट हुए बोले महिषासुर तुमने अपने कठिन तपस्या से मुझे खुश किया है , बोलो क्या चाहते हो महिषासुर ने बिना एक पल गवाह भगवान जी से कहा कि मुझे अमर कर दे यानी अमर होने का वरदान प्रदान करें , लेकिन ब्रह्मदेव ने बोले कि जो दुनिया में आता है उसे जाना ही पड़ता है यह प्रकृति का नियम है इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता 

तुम कुछ और वरदान मांग लो महिषासुर ने फिर सोच कर कहा भगवान आप मुझे यह वरदान प्रदान करें कि किसी देवता के हाथों ना मारा जाऊं और मैं अति शक्तिशाली बनो ताकि मुझे कोई भी हरा ना कर सके ब्रह्मा जी उसको वरदान देकर वहां से चले गए और वह वरदान पाकर अत्यंत शक्तिशाली हो गया फिर उसने अपना असली चेहरा लोगों के सामने दिखाना शुरू किया महिषासुर इंसानों की आत्माओं को मुक्त करने लगा और देव की आत्माओं को भी मुक्त करने लगा उसने देवताओं को भी हरा कर स्वर्ग लोग पर भी अपना राज जमा लिया सारे देव परेशान होकर और महिषासुर के आतंक को कर देख कर त्रिदेवो के पास पहुंचे उन्होंने ब्रह्मा विष्णु , से विनती की महिषासुर के आतंक से उनकी रक्षा करें पिंटू महिषासुर को तो वरदान प्राप्त है फिर त्रिदेवो एक देवी की रचना की ताकि हर असुर को मार सके क्योंकि देव उसे मार नहीं सकते थे ना ही मनुष्य उसे मार सकते थे

और तभी उस देवी को अस्त्र शस्त्र त्रिदेव ने प्रदान की और किस देवी की रचना हुई उस देवी को मां दुर्गा का नाम दिया गया और जब देवी महिषासुर के सामने प्रकट हुई तो महिषासुर उनकी खूबसूरती देख कर उन पर प्रसन्न हो उसने माता से विवाह करने की बात कही उन्होंने कहा कि हां मैं तुमसे विवाह जरूर करूंगी लेकिन एक शर्त है तुम्हें मेरी बात पर खरा उतरना पड़ेगा तुम्हें मुझे युद्ध में हराना होगा यदि तुमने मुझे युद्ध में हरा दिया तो मेरा विवाह तुम से निश्चिंत होगा ,  महिषासुर ने  माता से युद्ध करने के लिए तैयार हो गया 9 दिन होता है माता दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध चलता रहा और अंत में माता ने महिषासुर का वध कर दिया इसी दौरान दुर्गा पूजा कब मनाया जाता है अगर आप Durga Puja Par Nibandh चाहते हैं तो हमने इस Blog के अंदर निबंध भी दिया हुआ है जिसे आप पढ़ सकते हैं

Durga Puja Par Nibandh 300 शब्द में

दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग में हम आपको 300 वर्ड का निबंध देने वाले हैं दुर्गा पूजा पर जिसे आप अपने एग्जाम में बहुत अच्छी तरीके से लिख सकते हैं अगर आप से कभी कोई टीचर कहता है कि आप दुर्गा पूजा पर एस्से लिखकर लाओ निबंध लिखकर लाओ तो आप एक झटके में आप इसे लिख सकते हैं हमने Durga Puja Nibandh को बहुत अच्छी तरीके से बताने की कोशिश किया है ताकि आप इसे आराम से पढ़ सको आपके दिमाग में यह घुस सके और आप अपने एग्जाम में इसे लिख सको 

दुर्गा पूजा पर निबंध 

दुर्गा पूजा भारत का महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक त्यौहार है दुर्गा पूजा को दुर्गास्वयं या  शरदोत्स्व  के नाम से भी जाना जाता है दुर्गा पूजा आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर के महीने में होती है जिसके लिए लोगों की तैयारियां महीनों पहले से ही शुरू हो जाती है दुर्गा पूजा वैसे तो पूरे देश में मनाया जाता है हालांकि दुर्गा पूजा मुख्य रूप से बंगाल आसाम उड़ीसा झारखंड इत्यादि जगहों पर बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है दुर्गा पूजा मैं लोग 9 दिन तक मां दुर्गा की पूजा करते हैं उनसे सुख समृद्वि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। त्योहारों के अंत में देवी दुर्गा की प्रतिमा को नदिया या टैंक में विसर्जित कर दिया जाता है।  बहुत से लोग पूरे 9 दिनों का उपवास भी रखते हैं दुर्गा पूजा के  दसवें दिन  दशहरा / विजादसवीं  का आयोजन किया जाता है 

बच्चों अगर आपसे कोई भी दुर्गा पूजा पर निबंध लिखने के लिए बोले तो आप इस निबंध को लिख सकते हो यह 300 वर्ड का निबंध है जिसे आप अपने एग्जाम में लिख सकते हो और अपने मास्क , को अपने रिजल्ट को अच्छा लगते हो

Durga Puja के बारे में कुछ और 

दुर्गा पूजा को वास्तव में बुरी शक्ति पर अच्छी शकितयों द्वारा विजय पाने के साहस और बुरे कामों से बचने की इच्छा से मनाया जाता है जिससे विश्व की तमाम बुरी शक्तियों का अंत हो ,जिस प्रकार देवी दुर्गा का रूप धारण कर ,विष्णु भगवान और शंकर जी की शक्तियों को इकट्ठा करने के बाद दुष्ट राक्षस महिषासुर का नाश किया था ठीक उसी प्रकार बुराई की हार और अच्छाई की स्थापना की जा सके। देवी दुर्गा ने धर्म को बचाने के लिए एक स्त्री होने के बावजूद साहस और सच्चाई का परिचय दिया था ठीक उसी प्रकार हमें भी अपनी बुराईयों को नष्ट करके उनपर विजय प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए ,और हमेशा ऐसे ही कर्म करने चाहिए जिनसे मनुष्यता को बढ़ावा मिले और बुराई पर अच्छाई की हमेशा जीत हो सके। 

देवी दुर्गा की पूजा करने का यही संदेश होता है। हर धर्म के लोगो के लिए हर त्योहार का उनके जीवन में अपना ही एक विशेष महत्व होता है जिससे सभी मे खुशियों एवं उत्साह उत्पन्न होती है क्योंकि त्योहार को मनाने के बाद न केवल विशेष प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है बल्कि जीवन में उत्साह एवं जोश भरी ऊर्जा का संचार भी होता है| दुर्गा पूजा भी ऐसे ही बहुत से खुशियों एवं उत्साह से भर देने वाले त्योहारों में से एक त्योहार है। हिन्दू धर्म हो या फिर कोई और

दूसरा धर्म हो सभी के त्यौहार मनाने  के पीछे एक सामाजिक कारण जरुर होता ही है,जैसे दसहरा का त्योहार श्री राम जी द्वारा 14 साल के लंबे वनवास और राक्षश राजा रावण का वध करने के बाद अपने घर अयोध्या सः कुशल वापस आने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, ठीक उसी प्रकार दुर्गा पूजा का त्योहार मनाने के पीछे भी कुछ सामाजिक कारण है। बहुत से धर्म गुरुओं का यह भी मानना है कि इस दिन माँ दुर्गा ने दुष्ट राक्षस महिषासुर का वध किया था और बुराई पर अच्छाई के प्रतीक साबित हुई थी। दुर्गापूजा अत्याचार का नाश ,बुरी शक्तियों का खत्म और अनीति के प्रतीक के स्वरूप मनाया जाता है। 

त्योहारों को मनाए जाने के कारण प्रकर्ति को होने वाले नुकशान:-

दोस्तो वैसे तो त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक में बड़ी धूम धाम से मनाए जाते है , लेकिन मनुष्य अपनी खुशी एवं उत्साह में प्रकर्ति के बारे में कतई सोच विचार नही करता है, मनुष्य की लापरवाही के कारण, प्यार और खुशी में मनाए जाने वाले त्योहार पर्यावरण पर बड़े स्तर पर प्रभाव डालते है। त्योहारों के दौरान बनने वाली भगवान की मूर्तियां बहुत सारे केमिकलों से बनाई जाती है, जिसे त्योहार सम्पन्न होने के बाद गंगा आदि नदियों के जल में विसर्जित कर दिया जाता है ऐसे ही माँ दुर्गा की पूजा पर बनी मूर्ति को बनाने में और उनको रंगने में प्रयोग किए गए हानिकारक पदार्थ

जैसे- प्लास्टर ऑफ पेरिस,सीमेंट, प्लास्टिक,कलर आदि स्थानीय पानी में प्रवाहित किये जाने से न केवल पानी के स्रोतों में प्रदूषण का कारण बनते है बल्कि उनके आस पास के वातावरण को भी दूषित करते हैं।इस त्योहार से पर्यावरण पर गलत प्रभाव को कम करने के लिए,हम सभी को पर्यावरण को बचाने का प्रण लेना चाहिए और पानी को बचाने का प्रयास करना चाहिए और मूर्ति कलाकारों द्वारा पर्यावरण के अनुकूल पदार्थों से बनी मूर्तियों को ही बनाने की लिए प्रयास करना चाहिए, भक्तों को यह भी समझाना चाहिए कि सीधे ही मूर्ति को पवित्र गंगा के जल में विसर्जित ना करे इस परंपरा को निभाने के लिए कोई अन्य सुरक्षित तरीका निकालना चाहिए। 

Durga Puja Par Nibandh ( दुर्गा पूजा पर निबंध )

Durga Puja Par Nibandh

दुर्गा पूजा हिन्दुओं के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है, यह उत्सव दस दिनों तक चलता है जो हर साल कार्तिक के महीने में आता है , यह त्योहार वैसे तो पूरे दस दिनों तक मनाया जाता है किंतु दुर्गा माँ की पूजा सातवें दिन से ही की जाती है,दुर्गा माँ की पूजा सातवें दिन से दसवे दिन यानी आखरी के तीन दिन तक कि जाति है। दुर्गा पूजा हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा बहुत ही हर्षोलाश से हर साल प्रेम और विश्वास के साथ मनाया जाता है। दुर्गा पूजा एक बहुत ही बड़ा धार्मिक त्योहार है, जिसे हर साल पतझड़ के मौसम में मनाया जाता है। 

दोस्तो जैसा कि हमने आप सभी को बताया की पतझड़ के मौसम में हम सभी दुर्गा पूजा का त्योहार मनाते है, यह त्योहार दस दिनों तक चलता है जिसमे हर दिन माँ के अलग-अलग रूप को पूजा जाता है और उनका प्यार भरा आशिर्वाद प्राप्त किया जाता है। दुर्गा माँ की सातवें दिन से पूजा की जाती है, 

दुर्गा माँ को क्यों पूजा जाता है, उनके द्वारा किये गए महान कार्य आदि आज हम इस दुर्गा पूजा पर निबंध में बताने वाले है। इन सभी के बारे में बात करने से पहले हम आप सभी को दुर्गा पूजा से अवगत कराना चाहते है।

दुर्गा पूजा को मनाए जाने का अर्थ:-

दुर्गा पूजा वास्तव में बुराई पर विजय प्राप्त करने से जुड़ा हुआ त्योहार है और बुराई को मिटाने वाली शक्ति पाने की इच्छा से भी मनाया जाता है जिनके सदुपयोग से  विश्व की बुराईयों का जड़ से अंत किया जा सके। जिस प्रकार देवी दुर्गा ने ब्रह्मा, भगवान विष्णु और शिव जी की शक्तियों को अपने अंदर एकत्रित करके दुष्ट राक्षस महिषासुर का वध किया था और सच्चे और अच्छे धर्म को बचाया था, ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी अपनी बुराईयों पर विजय प्राप्त करके मनुष्यता को बढ़ावा दे सकें। दुर्गा पूजा का संदेश हर जाति धर्म के लोगो को एक साथ मिलकर बुराई के खिलाफ लड़ना होता है। हर त्योहार का मनुष्य के जीवन में अपना सीधा और कोई न कोई  विशेष महत्व जरूर  होता है, क्योंकि पूजा और उपवास करके न केवल विशेष प्रकार के आनंद की प्राप्ति होती है बल्कि जीवन में खुशी एवं नई ऊर्जा का संचार भी होता है। दुर्गापूजा भी एक ऐसा ही त्योहार है, जो हमारे जीवन में उत्साह एवं ऊर्जा का संचार करने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Durga Puja मनाने की असली वजह क्या है ?

दोस्तों आप सब ने बहुत बार मां दुर्गा की कहानी तो एक बार जरूर अपने जिंदगी में पड़ा होगा अगर नहीं पढ़ा होगा तो बहुत बड़े बुजुर्गों से सुना होगा लेकिन आपको क्या पता है कि दुर्गा पूजा मनाने की असली वजह क्या होता है अगर आपको नहीं पता तो आप इस Blog को आखिर तक जरूर पढ़ें ताकि हम आपको विस्तार तरीके से सारी जानकारी दे सके हमारे ब्लाक के अंदर आज के टाइम में मां दुर्गा की कहानी लगभग सारे लोग ही जानते हैं लेकिन लोगों को कहानी का असली उपाय नहीं पता होता है क्योंकि वह लोग इतनी अंदर तरीके से उसमे घुसे नहीं होते है लेकिन आप सब घबराहो नहीं हम आप सभी को सारी जानकारी देंगे हमें तो बस इतना बताया जाता है कि असुर का जो महाशुर था उसने भगवान जी की तपस्या किया था जिसकी वजह से उसको वरदान मिला था कि कोई उसे मार नहीं सकता है तभी त्रिदेवो ने मां दुर्गा का निर्माण किया था , और मां दुर्गा और असुर के बीच 9 दिन तक ही युद्ध हुआ था और दसवे दिन मां दुर्गा ने असुर का वध कर दिये थे , 

लेकिन दोस्तों आज के टाइम में लोगों को यह नहीं पता असली वजह क्या था दुर्गा पूजा मनाने का मैं आपको बता दूं कि असली वजह केवल एक ही मकसद था क्योंकि अच्छाई की जीत होना यानी इस दिन के लिए लोगों ने क्या क्या नहीं किया मां दुर्गा को जन्म लेना पड़ा और असुर का नाश करना पड़ा जिसकी वजह से आज दुर्गा पूजा इतनी अच्छी तरीके से मनाया जाता है लोग इसे मनाने के लिए बहुत उत्तेजित रहते हैं क्योंकि यह एक शांति का त्यौहार है यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है इसी दौरान से दुर्गा पूजा को मनाया जाता है , दसवीं दिन मां दुर्गा असुर का नाश कर देती है और फिर दुनिया में खुशी ही खुशी होती है जिसकी वजह से आज दुर्गा पूजा को मनाया जाता है लेकिन आपको कोई भी इसकी असली वजह नहीं बताता है अगर आपसे कोई पूछता है कि इसकी असली वजह क्या है तो आपको बताना है कि बुराई पर अच्छाई की जीत हो ना यही इसकी असली वजह है 

दुर्गा की पूजा क्यों कि जाति है:-

दुर्गा पूजा हिन्दुओं के कई मुख्य त्योहारों में से एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह हर साल बहुत सी तैयारियों के साथ देवी दुर्गा के सम्मान और उनके द्वारा महिषासुर राक्षश पर विजय की खुशी  में मनाया जाता है। माता दुर्गा हिमालय और मैनका की एक पुत्री थी और सती का अवतार थी, जिनकी बाद में भगवान शिव से शादी हुई थी। यह माना जाता है कि, दुर्गा पूजा सबसे पहली भगवान राम की रावण पर विजय के साथ शुरु हुई, जब भगवान राम ने रावण को मारने के लिए देवी दुर्गा से शक्ति प्राप्त करने के लिए दुर्गा पूजा की थी। दुर्गा पूजा से जुडी कई कथाएँ हैं। माँ दुर्गा  ने इस दिन महिषासुर नमक असुर का संहार किया था जो की भगवान का वरदान पाकर काफी शक्तिशाली हो गया था 

और तीनों लोक में किसी के द्वारा भी पराजित नही हो पा रहा था उस असुर ने पूरे लोक मे आतंक मचा रखा था। रामायण में यह लिखा हुआ है की भगवान राम जी ने दस सर वाले रावण का वध भी इसी दिन किया था, जिसे बुराई पर अच्छाई की जित मानी जाती है । इस पर्व को शक्ति का पर्व भी कहा जाता है। देवी दुर्गा की नवरात्र में पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि, उनके भक्ति द्वारा यह माना जाता है कि, उन्होने दस दिन और दस रात के युद्ध के बाद महिषासुर राक्षस को मार गिराया था। माँ दुर्गा के दस हाथ है, जिनमे हर हाथ मे अलग तरह का अस्त्र और विभिन्न प्रकार के हथियार भी हैं। देवी दुर्गा के कारण ही देव लोक के देवो को महिषाशुर असुर से राहत मिली, जिसके कारण लोग उनकी पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं।

दोस्तो आशा करते है आप सभी को हमारे द्वारा Blog गया यह Durga Puja Par Nibandh ( दुर्गा पूजा पर निबंध ) बहुत ही पसन्द आया होगा जिसमे हमने आप सभी को दुर्गा पूजा पर निबन्द लिखकर बहुत सी जानकारी से अवगत कराया है और उनसे जुड़े बहुत से रोचक तथ्यो को आपके सामने रखा।हमारा यह प्यारा सा निबंध पढ़ने के लिए धन्यवाद, और निबंधों के लिए जुड़े रहे हमारे साथ।

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