Essay on Child Marriage in Hindi- बाल विवाह पर निबंध

नमस्कार दोस्तों क्रेज़ी Crazyhindi.com पर आपका एक बार फिर से स्वागत है. आज का लेख आपके लिए बहुत ही खास होने वाला है क्योंकि आज के इस लेख में हम जाने वाले हैं बाल विवाह पर निबंध Essay on Child marriage (Bal Vivah) in hindi.

हमारे भारत देश में ऐसी कई सारी समस्या है जिन समस्या के कारण अपने देश का विकास कभी नहीं होता. वह सारी समस्याएं अपने देश के विकास के लिए बाधा रूप बन जाती है. इन सभी समस्याओं में से एक है बाल विवाह. Bal Vivah एक ऐसी बड़ी समस्या है जो भारतीय समाज में बहुत प्राचीन समय से होते आ रही है.

दोस्तों आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दूं कि बाल विवाह एक कुप्रथा है. यह प्राचीन काल में बहुत प्रचलित थी जो लड़के और लड़कियों का विवाह बहुत ही कम उम्र में करा दिया जाता था. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि Bal Vivah केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में होती थी और अभी भी होते हैं.

नवंबर 2007 में भारत सरकार ने बाल विवाह निषेध अधिनियम यानी कि  (Prohibition of Child marriage Act )  को लागू कर दिया था. इस नियम के अनुसार विवाह के वक्त लड़के की आयु 21 वर्ष और लड़की की आयु 18 साल होना आवश्यक है.

यदि कोई इस से कम उम्र में विवाह करता है तो उन लोगों को दंडित किया जाएगा. हाल के समय में बाल विवाह भारत में पूरी तरह से प्रतिबंधित है लेकिन अभी भी बहुत सारी जगहों पर बाल विवाह (Child Marriage in Hindi) होता है. ऐसा माना जाता है कि भारत के केरल, बिहार बहुत सारे राज्य है जिनमें आज भी बाल विवाह प्रचलित है .

भारत एक शक्तिशाली देश के रूप में उभर रहा है और वही बाल विवाह जैसी कुप्रथा हमारे देश के विकास को रोक रही है.

Bal Vivah – हमारे देश की काली सच्चाई

हम सब जानते हैं कि आज के इस आधुनिक युग में सारी दुनिया बहुत आगे निकल गई है. हमारा भारत देश में उन देशों में शामिल है जो तेजी से विकास की ओर बढ़ते जा रहा है. लेकिन इस बात का हमें स्वीकार करना होगा कि हमारे भारत देश में अभी भी ऐसी बहुत सारी समस्याएं हैं जो हमारे देश के विकास के लिए बाधा बनकर खड़ी हो गई है.

बाल विवाह (Bal Vivah) भी उन समस्याओं में शामिल है. बहुत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहे हमारे भारत देश की बाल विवाह(Child Marriage in Hindi) एक काली सच्चाई है. आज भी बाल विवाह भारत देश में चलने वाले प्रचलित प्रथा है बाल विवाह अब गैर कानूनी काम होने के बावजूद भी बहुत सारी जगह पर छोटे-छोटे गांवों में बाल विवाह होते हैं.

उन लोगों की सोच से बाल विवाह का मतलब एक लड़के और लड़की को व्यवहारिक बंधन में बाँध देना. लेकिन वह लोग यह नहीं सोचते कि दोनों की सहमति है या फिर नहीं. बहुत ही कम उम्र में उनकी शादी कराई दी जाती है उसे इन लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता.

भारत में Bal Vivah प्राचीन काल से ही होते हैं. दिल्ली सल्तनत के समय विदेशियों द्वारा लड़कियों के साथ बलात्कार और अपहरण की घटनाएं बहुत बार होती रहती थी. अपने बच्चों को इस घटना से बचाने के लिए मां-बाप की अपने बेटियों का विवाह करने के लिए तैयार हो जाते थे और इसीलिए बाल विवाह (Child Marriage in Hindi) को प्रोत्साहन मिलता गया.

आजादी से पहले भारत के एक वरिष्ठ नागरिक राजाराम मोहन राय, केशव चंद्र ने बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई थी. उन्होंने ब्रिटिश सरकार से “स्पेशल मैरिज एक्ट” पारित करवाया था. जिसके अंतर्गत लड़कियों की उम्र 14 साल और लड़कों की उम्र 18 साल की निर्धारित की गई थी.

बाल विवाह होने के कारण (Reasons of Child marriage in Hindi)

essay on child marriage in hindi

बाल विवाह (Child Marriage) एक ऐसी प्रथा है जो भारत देश में बहुत प्राचीन समय से चली आ रही है. पहले के जमाने में बहुत ज्यादा मात्रा में बाल विवाह होते थे. इस प्रथा के कारण उन दोनों बच्चों का भविष्य बिगड़ता था जिनका बाल विवाह हुआ है उन बच्चों के भविष्य के बारे में कोई भी कभी भी नहीं सोचता था.

Bal Vivah के कारण उनका भविष्य पूरी तरह से खराब हो जाता है. आगे चलकर उन दोनों को बहुत सारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता था और हम दोनों के लिए यह बहुत नुकसान कारक था. Bal Vivah के ऐसे तो बहुत कारण थे और अभी भी है जिस कारण यह बाल विवाह होता है.

आज के समय में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो गरीबी के कारण अपने बच्चों का बाल विवाह कर देते हैं यानी जल्दी से विवाह कर देते हैं. अपने बच्चों का बाल विवाह उन सबको अपनी जिम्मेदारी से जल्दी छुटकारा मिल जाता है. कुछ लोगों की पढ़ाई लिखाई कम होने के कारण बहुत ज्यादा विचारों का ज्ञान नहीं होता है इसलिए अभी वह अपने बच्चों का बाल विवाह कर देते हैं. ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो बाल विवाह को परंपरा मानते हैं.

ऐसे ही बहुत सारे कारणों के चलते आज भी हमारे भारत देश में बहुत सारी जगहों पर बाल विवाह (Child Marriage in Hindi) होता है.

बाल विवाह(Child Marriage in Hindi) से बच्चो को होने वाले नुकसान

इस दुनिया का एक नियम है जो भी मानव निर्मित चीजें होती है उन सभी चीजों के कुछ फायदे होते हैं तो उसके साथ-साथ कुछ नुकसान भी है. फिर चाहे वह कोई चीज हो या फिर इंसानों ने बनाई हुई कोई पारंपरिक प्रथा. ऐसी बहुत सारी प्रथा है जो प्राचीन समय से चली आ रही है. उनमें से प्रथा में हमें फायदा होता है तो इसके साथ है एसी बहुत सारी प्रथा है जिनके कारण पुराने समय से नुकसान ही होते आ रहा है.

उन प्रथाओं में से एक है Bal Vivah (Child Marriage in Hindi) भी एक ऐसी प्रथा है जो भारत में बहुत प्राचीन काल से चली आ रही है. बाल विवाह में किसी का भला नहीं होता सब का बुरा ही होता है. पारिवारिक दबाव होने के कारण बच्चों को बहुत ही छोटी उम्र में शादी के लिए दबाव में डाला जाता है. जो आगे चलकर सबके लिए नुकसान कारक साबित होता है.

ऐसी निर्लज्ज प्रथा की वजह से दो निर्दोष बच्चों के भविष्य के बारे में कोई नहीं सोचता दोनों बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाता है. जिस उम्र में बच्चे खेलने कूदने के लिए जीता है और स्कूल जाने के लिए रोता है उस उम्र में उसकी शादी कर दी जाती है.

बच्चों को तब शादी का मतलब भी पता नहीं होता इतनी छोटी उम्र में उनकी शादी कराई जाती जो मानसिक रूप से दुर्बल बना देता है .शादी की उम्र से पहले ही शादी करने की वजह से शारीरिक रूप से भी दुर्बल हो जाते हैं जो उन दोनों बच्चों के लिए बहुत नुकसान कारक है.

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बाल विवाह (Child Marriage) को रोकने के तरीके

बाल विवाह सभी बच्चों के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है. इससे छोटे-छोटे बच्चों में कई प्रकार के नुकसान होते हैं फिर चाहे वह मानसिक नुकसान हो या शारीरिक नुकसान. हम सब को एक साथ मिलकर इस Bal Vivah प्रथा को रोकना होगा जिससे हमारे देश का विकास भी हो सके. बाल विवाह को हटाने के लिए हमें सारे तरीके अपनाने होंगे.

इस काली सच्चाई को रोकने के लिए हमें लोगों में जागरूकता फैलाने होगी जिसकी मदद से अशिक्षित लोगों को शिक्षित करना होगा और इस बाल विवाह के विषय पर सब कुछ बताना होगा. जिसकी वजह से उन सब लोगों को बाल विवाह से होने वाले नुकसान की जानकारी मिलेगी जो बाल विवाह (Child Marriage in Hindi) नामक समस्या को प्रोत्साहन देते हैं.

इससे बहुत बड़ा फायदा यह होगा कि बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों का विवाह इस सहमति से और निश्चित आयु प्राप्त करने के बाद ही करेंगे. शादी की उम्र हो जाए तो बच्चों को अपने जीवन साथी को तलाशने के लिए आसानी रहेगी. इस प्रथा पर रोक लगाने के लिए हमारे भारत सरकार को सख्त से सख्त कानून बनाने होंगे.

जिसके कारण यह प्रथा जड़ मूल से नष्ट हो जाए और भी ऐसे बहुत सारे तरीके हैं जिसको अपना कर्म इस बाल विवाह को रोक सकते हैं.

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Bal Vivah होने के कारण और नुकसान संक्षिप्त मे

बाल विवाह (Child marriage in Hindi) के कारण:

  • प्रेम विवाह
  • महिला ओ से यौन अपराध और छेड़छाड़
  • गरीबी
  • पारिवारिक दबाव
  • बेटी के चरित्र के बारे मे चिंता
  • शिक्षा का अभाव
  • अँध विश्वास

बाल विवाह होने के नुकसान:

  • ख़राब सेहद
  • लडकियों का कम उम्र मे माँ बनाना
  • बच्चो का भविष्य बिगड़ना
  • मानसिक और शारीरिक नुकसान
  • अपूर्ण मानसिक विकास
  • मृत्यु दर मे वृध्धि
  • स्त्री रोग मे वुध्धि
  • उच्च शिक्षा मे बाधा

बाल विवाह के प्रभाव

बच्चों की शादी जब बहुत छोटी उम्र में करा दी जाती है तो एक छोटी सी बच्ची को अपने घर छोड़ने और दूसरे स्थान पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है. बचपन में उसे कुछ भूमिका निभाने के लिए दबाव में डाला जाता है और मजबूर किया जाता है.जिनके लिए वह सभी मानसिक रूप से तैयार नहीं है.

मां और बहू ऐसी बड़ी बड़ी जिम्मेदारी को निभाना एक छोटी सी बच्ची के लिए मुश्किल होता है. लड़कों के लिए भी Bal Vivah उतना ही गंभीर समस्या है जितनी लड़कियों के लिए उन्हें भी अपने बचपन से ही अपनी पत्नी केदारी उठानी पड़ती है और स्वयं अपना खर्चा भी चलाना पड़ता है.

खेलने और पढ़ने-लिखने की उम्र में दूसरे की जिम्मेदारी उठाने मैं उनका सारा बचपन खो जाता है. बाल विवाह से एचआईवी और यौन जैसी बहुत सारी बीमारियों से संक्रमण का खतरा भी रहता है इसके. अलावा होने वाला बच्चा भी जन्म के समय कुपोषण से पीड़ित हो जाता है.

बिहार में बाल विवाह (Child Marriage in Hindi) का दर 68% है जो ज्यादा है. हिमाचल प्रदेश मे बाल वीवः का दर सबसे कम 9% है.

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उपसंहार

हमारे भारत देश में Bal Vivah बहुत ज्यादा मात्रा में हो रहा है. यह प्रथा हमारे देश के विकास के मार्ग में बाधा बन के खड़ी है. बाल विवाह को रोकना अनिवार्य है क्योंकि इसमें बच्चों का भविष्य बिगड़ता है और वह हमारे देश का भविष्य है.

अगर हमारे देश के बच्चों का भविष्य सुधरा तो हमारा देश विकास की ओर तेजी से बढ़ सकता है. यह प्रथा हमारे देश के बच्चों को उच्च शिक्षा देने के बजाय उनका बाल विवाह कराकर उनके उज्जवल भविष्य को रोका रही है इसलिए हमारे भारत देश में Child Marriage in Hindi की प्राचीन प्रथा को पूरी तरह से नष्ट करना अनिवार्य है.

अंत में उम्मीद करता हूं कि आपको आज का हमारा यह लेख (Bal Vivah par nibandh) बाल विवाह पर निबंध Essay on Child Marriage in Hindi बहुत पसंद आया होगा. यदि आपको आर्टिकल पसंद आया है तो आप इसे सोशल मीडिया पर और अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें ताकि वह भी इस जानकारी का फायदा उठा सकें.

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